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बाल सरंक्षण योजना के अन्तर्गत जिलाधिकारी एवम बाल संरक्षण समिति की बैठक हुई
September 23, 2019 • Ajit Kumar Singh

उत्तराखंड - देहरादून - 23-09-2019 जिलाधिकारी कार्यालय सभागार में जिलाधिकारी सी रविशंकर की अध्यक्षता में समेकित बाल सरंक्षण योजना के अन्तर्गत बाल संरक्षण समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में जिलाधिकारी ने बाल संरक्षण गृहो एवं अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं में रहने वाले बालक-बालिकाओं के आधार कार्ड बनवाने, टास्कफोर्स की कार्यवाही, जन्म एवं स्थाई प्रमाण पत्र बनाने, बैंक खाते खुलवानें, रोस्टर बनाकर कांउसिलिंग करवाने, स्कूलों में प्रवेश कराने, सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से 1098 हेल्पलाईन का डिस्पले करवाने, पैरालीगल वाॅलिंटियर्स के माध्यम से जन जागरूकता अभियान चलाने एवं बच्चों के कौशल विकास कराने के साथ ही राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित अभियान मूक्ति को कार्यान्वित करवाने के निर्देश बाल संरक्षण अधिकारी को दिये। समिति की बैठक में बताया गया कि बाल संरक्षण समिति के तहत्  विधि विवादित, अनाथ, निराश्रित, परित्यक्त बच्चों, जरूरत मंद एवं देखरेख वाले, खोया-पाया और लापता, सड़क/गली में घूमने वाले, काम करने वाले, भिक्षावृति/कूड़ा बिनने के कार्यों में लगे,  दुव्र्यवहार से उत्पीड़ित , तस्करी वाले, संघर्ष और आपदा से प्रभावित, एचआईवी से उत्पीड़ित, मादक द्रव्यों के सेवन व पारिवारिक उत्पीड़न से ग्रस्त अलग तरह के संक्षम बच्चों का संरक्षण  करना एवं उनसे सम्बन्धित मामलों का संज्ञान लेना व निस्तारण कर उन्हें देखभाल, संरक्षण सहायता व पुनर्वासन प्रदान करना। इस अवसर पर  अवगत कराया गया कि निराश्रित बालक बालिकाओं की देखरेख हेतु, संस्थाएं राजकीय सम्प्रेक्षण गृह, किशोर/किशोरी निरीक्षण गृह, सुरक्षा का स्थान, खुला आश्रय गृह, देखभाल गृह, विशेष दत्तक ग्रहण ऐजेंसीं, प्रर्वतकता, पालक देखभाल, बाल देखभाल संस्थाओं/महिलागृहों का पंजीकरण करवाये जाने जैसे कार्यक्रम सम्पादित किये जाते हैं। बैठक में संस्थाओं में निरूद्ध अन्य राज्यों के बालक/बालिकाओं के स्थानान्तरण हेतु पुलिस व्यवस्था, बाल गृहों में निवासरत बालक/बालिकाओं के स्थायी प्रमाण पत्र/आधार प्रमाण पत्र बनवाने की कठिनाईया, पंजीकृत व गैर सरकारी संस्थाओं में माह  में एक बार मेडिकल कैम्प लगवाये जाने, संस्था एवं संस्था में नियुक्त कार्मिकों के पुलिस सत्यापन कराये जाने, ब्लाक, ग्राम एवं वार्ड स्तरीय बाल संरक्षण के गठन, मानसिक बच्चों के लिए अलग संस्था व कर्मचारी/माली की व्यवस्था, संस्थाओं हेतु मनोचिकित्सक/मनौवैज्ञानिक की व्यवस्था, संस्थाओं में विशेष शिक्षक की व्यवस्था हेतु चर्चा, संस्थाओं हेतु द्विभाषीय की व्यवस्था, स्पोन्र्ससिप, 10 वर्ष से अधिक के बालकों हेतु बाल गृह, संस्थाओं के बालक/बालिकाओं के विद्यालय में प्रवेश आदि विषयों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, मुख्य शिक्षा अधिकारी आशारानी पैन्यूली, बाल सरंक्षण समिति तथा स्वयंसेवी संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

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